Poet: Allama Mohammad Iqbal
Singer: Ustad Nusrat Fateh Ali Khan

Hindi lyrics

कभी हकीकतमुन्तज़र, नज़र लिबासमजाज़ मे
के हज़ारो सजदे तड़प रहे है मेरी जबीननियाज़ मे

मै जो सरबासजदा हुआ कभी, तो ज़मीन से आने लगी सदा
तेरा दिल तो है सनम आशना, तुझे क्या मिलेगा नमाज़ मे

तू  बचाबचा के ना रख इसे, तेरा आईना है वो आईना
के शिकस्ता हो तो अजीज्तर, है निगाहअईनासाज़ मे 

न कहीं जहाँ में अमां मिली, जो अमां मिली तो कहाँ मिली
मेरी जुर्म-ए-खानाखाराब को, तेरे अफ़व-ए-बन्दानवाज़ में
ना वो इश्क मे रही गर्मिया, ना वो हुस्न मे रही शोकिया

ना वो गज़नवी मे तड़प रही, ना वो ख़म है ज़ुल्फ़आयाज़ मे 

मै जो सरबासजदा कभी हुआ, तो ज़मीन से आने लगी सदा
तेरा दिल तो है सनम आशना, तुझे क्या मिलेगा नमाज़ मे

for  English translation please see this elaborately explained blog post
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